नोएडा के फेस-2 स्थित सेक्टर-81 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रेफी एम फाईबर कंपनी की रक्षा उपकरण एवं इंजन टेस्ट फैसिलिटी का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1947 से भारत विभिन्न युद्धों का सामना करता रहा है। युद्ध लड़ने का तरीका बदला गया है। ऑपरेशन सिंदूर ने युद्ध के एक नए दौर में प्रवेश किया, जिसने भारत के सामर्थ्य का एहसास दुनिया को कराया। लेकिन इसने हमें भविष्य की चुनौतियों से जूझने की प्रेरणा भी दी।

हम सभी जानते हैं कि ताकत हो तो दुनिया नतमस्तक होती है। उन्होंने गुरु द्रोणाचार्य का जिक्र करते हुए कहा कि जब उनसे पूछा गया कि आप शस्त्र क्यों धारण कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि शस्त्र और शास्त्र के बेहतर समन्वय से राष्ट्र शक्तिशाली होता है। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप ने भी कहा था- वीर भोग्या वसुंधरा। रक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश पहले से समृद्ध रहा है। यहां 9 ऑर्डिनेंस फैक्ट्री पहले से कार्यरत हैं, जो रक्षा उत्पादन में योगदान दे रही हैं। चार डिफेंस पीएसयू उत्तर प्रदेश में पहले से मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश की चुनौतियों को देखते हुए दो नए डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग केंद्र दिए, जिसमें एक यूपी को मिला। अलीगढ़, आगरा, कानपुर, लखनऊ, झांसी और चित्रकूट में विकास कर रहे हैं। अब तक 12.5 हजार एकड़ लैंड उपलब्ध कराई गई है। जितनी भी सुविधा चाहिए, यूपी सरकार उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ब्रह्मोस मिसाइल का केंद्र लखनऊ में बनाया है। अब लखनऊ ब्रह्मोस मिसाइल के रूप में भी जाना जाता है। लखनऊ की मुस्कुराहट तब तक अधूरी थी, जब तक मिसाइल की गूंज दुश्मन के कानों तक न पहुंचे। ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस ने अपनी क्षमता दिखाई।

इस मौके पर रेफी एम फाईबर के चैयरमेन विकास मिश्रा ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत तेजी से रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है और अत्याधुनिक तकनीक आधारित निर्माण से मेक इन इंडिया अभियान को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक ऐसे अत्याधुनिक उपकरण और तकनीक विकसित कर ली जाएगी, जिससे हमारे देश को किसी दूसरे देश से फाइटर प्लेन लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इस नई यूनिट और टेस्ट फैसिलिटी से देश की सामरिक शक्ति और अनुसंधान क्षमताओं में वृद्धि होगी, साथ ही युवाओं के लिए रोजगार और नवाचार के अवसर भी उपलब्ध होंगे।

उन्होंने कहा कि सन 2017 में 10 सदस्यों के साथ इस कंपनी का शुभारंभ किया गया था और आज 600 से ज्यादा वैज्ञानिक, शोधकर्ता, इंजीनियर और क्षेत्र विशेषज्ञ इसमें कम कर रहे हैं। अब हम प्रत्येक महीने 150 से ज्यादा अधिक ऊंचाई वाले लॉजिस्टिक्स ड्रोन और 300 छोटे यूएवी तक बना रहे हैं।
