इनदिनों नोएडा का निक्की हत्याकांड पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। निक्की के पिता ने आरोप लगाए है कि दहेज के लिए उनकी बेटी को जलाकर मार डाला है। खादर के जंगल रहे गौतमबुद्ध नगर में शादियों में फूहड़ता पन भी साफ दिखाई देता है। शादियों में कई—कई डीजे, हाथ, घोड़ा नचाना, रिश्तेदारों को शराब पिलाने का चलन भी तेजी के साथ उभरा है। साथ ही मिले मुआवजे से शादियों में मोटा दहेज देना भी एक बीमारी बनी है।

निक्की के पिता ने आरोप लगाए है कि उन्होंने दहेज में स्कॉर्पियों कार और बुलेट दी। उसके ससुराल पक्ष की तरफ से लगातार 35 लाख रुपये की ओर डिमांड की जा रही थी। हालांकि, सोशल मीडिया में यह चर्चा का विषय बना। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि जब लड़का कमाता नहीं था तो उसे स्कॉर्पियों और बुलेट नहीं देनी चाहिए था। इस मुद्दे पर लोगों ने अपने—अपने विचार रखे है।

बुजुर्ग रामसेन ने बताया कि पुराने समय में सादगी भरी शादियों होती थी। फिलहाल के दौर में दहेज के साथ फिजुलखर्ची भी अधिक की जाती है। लड़के की काबलियत की जगह उसका घर ही देखते और महंगी गाड़ियां देने से पीछे नहीं हटते है। हैसियत भले ही उसकी कुछ भी न हो, लेकिन घर अच्छा होना चाहिए। यहां तक की संपत्ति बेचकर शादी में मोटा दहेज देना स्टेट्स सिबंल माना जाता है। उन्होंने बताया कि दहेज देना और लेना सामाज में स्तर बढ़ने की सोच लोगों में पैदा हो गई है, जोकि पूरी तरह से गलत है।

हेलीकॉप्टर से दुल्हन का भी बढ़ा था चलन
हेलीकॉप्टर से दुल्हन ले जाना, महंगी—महंगी लग्जरी गाड़ियां और अन्य कीमती उपहार देकर समाज में खुद को बड़ा दिखाने का चलन बढ़ा है। इसका असर बेटी वालों पर भी पड़ा। गौतमबुद्ध नगर में कई ऐसी शादियां हुई, जिनमें दुल्हन की विदाई कर हेलीकॉप्टर से ले जाया गया। जिससे देखते हुए हैसियत न होने के बाद भी मोटा दान—दहेज देना पड़ा है।

ठेकेदारों ने लिया दहेज तो समाज ने किया उनसे बॉयकाट
बिना दान—दहेज की शादी और फिचुल खर्ची को रोकने लिए दहेज विरोधी आंदोलन की शुरूआत की गई। जिसकी मुहिम से बड़ी संख्या में लोग जुटे। लेकिन दहेज विरोध मुहिम चलाने वालों ने अपने बच्चों की करोड़ों की शादी की। साथ ही दहेज के लिए उपजे विवाद को सुलझाने के लिए ठेकेदारों ने पैसे लेने शुरू कर दिए। उनकी पोल खुलने पर समाज के लोगों ने दहेज विरोधी आंदोलन चलाने वालों से दनकिनार कर ​लिया।

ससुराल में सबसे ज्यादा उत्पीड़न की शिकार होती है महिलाएं
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य डॉ. मीनाक्षी भराला बुधवार को निक्की के गांव रुपबास पहुंची थी। उन्होंने कहा कि यूपी में उत्पीड़न के इस साल छह हजार से अधिक सामने आए है। महिलाओं पर सबसे ज्यादा अत्यचार उनके ससुराल में होते है। सरकार पिता की संपत्ति में बराबर का हक दिया हुआ है। रात को दो बजे बाहर घूमने वाली महिला और लड़कियां सुरक्षित है, लेकिन घर में नहीं।

दहेज पर सर्व समाज को एकत्रित होने की वकालत
उन्होंने दहेज को समाज के लिए गलत बतातेे हुए कहा कि इस मुद्दे पर सर्व समाज को आगे आने की बात कही। सभी को एकराय होकर दहेज लेने और देने का विरोध करना होगा। उन्होंने कहा कि जब पिता ने कन्यादान में अपनी बेटी देता है तो दहेज की जरुरत नहीं होती है।